जनजातीय कारीगरों को ई-कॉमर्स और वित्तीय सहायता देने की पहल: सांसद सोलंकी

संवाददाता रवि शिमले बड़वानी
बड़वानी। राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद के बजट सत्र में जनजातीय कारीगरों की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के मुद्दे पर जनजातीय मंत्री से प्रश्न किया। उन्होंने जानना चाहा कि जनजातीय कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर व्यवसाय विकसित करने में किस प्रकार की वित्तीय और संभारतंत्रीय सहायता प्रदान की जाएगी और क्या यह लाभ सर्वाधिक वंचित जनजातीय समुदायों तक पहुंचेगा।
सांसद सोलंकी का सवाल और सरकार का जवाब
सांसद डॉ. सोलंकी ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या जनजातीय समुदायों की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास संस्थाओं के साथ सहयोग का विस्तार करने की योजना है। इस पर जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने लिखित जवाब देते हुए बताया कि ट्राइफेड (TRIFED) द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) को लागू किया जा रहा है।
ट्राइफेड की पहल और योजनाएँ
राज्यमंत्री उइके ने बताया कि इस योजना के तहत –
✔ जनजातीय कारीगरों को सूचीबद्ध किया जा रहा है
✔ जनजातीय उत्पादों की खरीद और विपणन को प्राथमिकता दी जा रही है
✔ आजीविका के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है
इसके अलावा, ट्राइफेड “ट्राइब्स इंडिया” आउटलेट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजातीय उत्पादों का विपणन करता है। सरकार ने 13000 से अधिक जनजातीय उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर शामिल किया है।
पीएम जनमन योजना के तहत विशेष सहायता
जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन योजना) के तहत भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
✔ 506 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए वन धन विकास केंद्र (VDVKs) स्थापित किए गए हैं
✔ इन समूहों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को प्राथमिकता दी गई है
सांसद सोलंकी की प्रतिक्रिया
सांसद सोलंकी ने सरकार के जवाब पर संतोष जताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुँचना चाहिए और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनजातीय कारीगरों को वैश्विक बाजारों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने जनजातीय समुदायों के लिए अधिक वित्तीय और तकनीकी सहायता की मांग भी की।
जनजातीय कारीगरों के लिए नई संभावनाएँ
सरकार की ये योजनाएँ जनजातीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने, उनके उत्पादों को बेहतर बाजार देने और आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।