यातायात सुरक्षा की आड़ में शाहपुर पुलिस की अवैध वसूली! गरीबों से की जा रही मनमानी वसूली, वीडियो वायरल

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर
बैतूल/शाहपुर: एक ओर जहां मध्य प्रदेश में यातायात विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले के शाहपुर क्षेत्र में पुलिस पर इसी अभियान की आड़ में अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शाहपुर में पुलिस की गतिविधियां यातायात सुधार के बजाय गरीबों की जेब ढीली करने का जरिया बन चुकी हैं। नगर परिषद अध्यक्ष मयंक वर्मा ने बताया कि कुंडी टोल प्लाजा के पास पुलिस द्वारा लगातार वैध दस्तावेज होने के बावजूद वाहन चालकों को रोककर पैसों की मांग की जा रही है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, 150 रुपये की मनमानी रसीद
वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा गया कि शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मी चालकों से मनमर्जी से पैसे वसूल रहे हैं और उसके बदले मात्र 150 रुपये की रसीद थमा रहे हैं। कई मामलों में वाहन पूरी तरह वैध दस्तावेजों के साथ चलाए जा रहे हैं, फिर भी पुलिस चालान के नाम पर अवैध वसूली कर रही है।
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“हैसियत नहीं है तो मोटर साइकिल क्यों खरीदी?” – पुलिस की टिप्पणी
शाहपुर में मजदूरी के लिए आए आदिवासी युवक रंजीत सिरसम ने बताया कि वह 200 रुपये की मजदूरी के लिए आया था, लेकिन पुलिस ने 300 रुपये के चालान की बात कहकर उसकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली और अपमानजनक शब्दों में उसे फटकारते हुए भगा दिया। रंजीत ने बताया कि जब उसने किसी परिचित से फोन पर बात कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने बिना कोई सुनवाई किए उसे वहां से खदेड़ दिया।
एएसई ने थाना प्रभारी का दिया हवाला, सवालों से कन्नी काटी
जब पत्रकारों ने इस पूरे मामले में एएसई से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि “मैं किसी अध्यक्ष को नहीं जानता। पुलिस अपने नियम से चलेगी।” साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जिम्मेदारी थाना प्रभारी पर डाल दी।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में गरीबों के साथ अन्याय
बैतूल जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां शाहपुर जैसे इलाकों में लोग रोजगार के लिए दूर-दराज से आते हैं। ऐसे में यदि पुलिस इस तरह गरीबों और मजदूर वर्ग के लोगों से मनमानी वसूली करेगी, तो यह न केवल प्रशासनिक गंभीरता की मांग करता है, बल्कि यह कानून व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और गरीबों को न्याय दिलाने के लिए कौन आगे आता है।